गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में शामिल हुए भाजपा नेता

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। भारत का लोकतंत्र जितना मजबूत और सशक्त होगा, देश उतनी ही तेजी से आत्मनिर्भरता और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेगा। इसी संदेश के साथ जनपद गोरखपुर में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में भाजपा नेताओं एवं एनडीए के सहयोगी दलों के सदस्यों ने सहभागिता की।
इस पदयात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी सहित एनडीए के सहयोगी सदस्य शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा एवं मजबूती बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई। उनका कहना था कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और मजबूती पर आधारित है, इसलिए इन संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन की राजनीति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा।
पदयात्रा के माध्यम से भाजपा और एनडीए ने लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा राजनीतिक जवाबदेही का संदेश देने का प्रयास किया। साथ ही विपक्षी दलों से अपने राजनीतिक रुख को लेकर देश की जनता के सामने स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग भी उठाई गई।
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इस पदयात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी सहित एनडीए के सहयोगी सदस्य शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा एवं मजबूती बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई। उनका कहना था कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और मजबूती पर आधारित है, इसलिए इन संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन की राजनीति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा।
पदयात्रा के माध्यम से भाजपा और एनडीए ने लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा राजनीतिक जवाबदेही का संदेश देने का प्रयास किया। साथ ही विपक्षी दलों से अपने राजनीतिक रुख को लेकर देश की जनता के सामने स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग भी उठाई गई।
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