अल्पवर्षा की आशंका के बीच किसानों को वैज्ञानिक खेती के बताए गए तरीके

मौसम में संभावित बदलाव और अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को खेती की तैयारी वैज्ञानिक तरीके से करने की सलाह दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को आत्मा के तत्वावधान में मधुबनी प्रखंड मुख्यालय में प्रखंड स्तरीय रबी कर्मशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जल संरक्षण, कम पानी में तैयार होने वाली फसलों, आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बीडीओ कुंदन कुमार, प्रखंड प्रमुख विजया सिंह, प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुमित कुमार, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रामपुकार बैठा, नोडल कृषि समन्वयक रविंद्र कुशवाहा एवं विधायक प्रतिनिधि सुनील कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कर्मशाला को संबोधित करते हुए बीडीओ कुंदन कुमार ने कहा कि संभावित अल्पवर्षा की स्थिति में किसानों को पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए वैकल्पिक फसलों की खेती पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली मड़ुआ, मसूर, गेहूं और मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही किसानों से प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रामपुकार बैठा ने आत्मा योजना, जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, जल संरक्षण और बिहार कृषि ऐप के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, नोडल कृषि समन्वयक रविंद्र कुशवाहा ने कृषि यंत्रीकरण, फार्मर रजिस्ट्री, बीज उत्पादन, कृषि ड्रोन के उपयोग, फसल विविधीकरण और संकर गेहूं की खेती के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुमित कुमार ने किसानों से धान की कटाई के बाद खेतों में पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली से जैविक खाद तैयार कर खेतों में उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही बेहतर फसल उत्पादन के लिए मिट्टी की नियमित जांच कराने और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन किसान सलाहकार रामराज सिंह ने किया। इस अवसर पर किसान सलाहकार मणिन्द्र कुशवाहा, प्रगतिशील किसान सतेंद्र यादव, बृजभूषण यादव, हिरामन बिन, राहुल यादव, आद्या खरवार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कर्मशाला के माध्यम से किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों के अनुरूप खेती की तैयारी करने, पानी बचाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बीडीओ कुंदन कुमार, प्रखंड प्रमुख विजया सिंह, प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुमित कुमार, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रामपुकार बैठा, नोडल कृषि समन्वयक रविंद्र कुशवाहा एवं विधायक प्रतिनिधि सुनील कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कर्मशाला को संबोधित करते हुए बीडीओ कुंदन कुमार ने कहा कि संभावित अल्पवर्षा की स्थिति में किसानों को पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए वैकल्पिक फसलों की खेती पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली मड़ुआ, मसूर, गेहूं और मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही किसानों से प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रामपुकार बैठा ने आत्मा योजना, जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, जल संरक्षण और बिहार कृषि ऐप के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, नोडल कृषि समन्वयक रविंद्र कुशवाहा ने कृषि यंत्रीकरण, फार्मर रजिस्ट्री, बीज उत्पादन, कृषि ड्रोन के उपयोग, फसल विविधीकरण और संकर गेहूं की खेती के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुमित कुमार ने किसानों से धान की कटाई के बाद खेतों में पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली से जैविक खाद तैयार कर खेतों में उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही बेहतर फसल उत्पादन के लिए मिट्टी की नियमित जांच कराने और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन किसान सलाहकार रामराज सिंह ने किया। इस अवसर पर किसान सलाहकार मणिन्द्र कुशवाहा, प्रगतिशील किसान सतेंद्र यादव, बृजभूषण यादव, हिरामन बिन, राहुल यादव, आद्या खरवार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कर्मशाला के माध्यम से किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों के अनुरूप खेती की तैयारी करने, पानी बचाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का संदेश दिया गया।
रिपोर्ट: कृष्णानंद मिश्र, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण बिहार
WhatsApp पर शेयर करें



