आरोग्य ही सबसे बड़ा धन, धन्वंतरि जयंती का यही संदेश

धनतेरस केवल खरीदारी और समृद्धि का पर्व नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के महत्व को समझने का भी अवसर है।
संपादकीय | 6 नवंबर 2026
भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देते हैं। धनतेरस यानी धनत्रयोदशी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हमें धन-संपत्ति के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य की अहमियत का एहसास कराता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ा हुआ है। इसी अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तब उससे अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए। इसी समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा पद्धति का देवता माना जाता है। भारतीय परंपरा में उनका स्थान केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन की कामना से भी जुड़ा है।
आज के दौर में जब बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, मानसिक तनाव और प्रदूषण जैसी चुनौतियां लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, तब धन्वंतरि जयंती का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि बड़ी से बड़ी संपत्ति भी अच्छे स्वास्थ्य के सामने छोटी है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो धन, वैभव और सुविधाओं का आनंद भी अधूरा रह जाता है।
धनतेरस पर लोग सोना, चांदी, बर्तन और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। घरों में माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन इस अवसर पर हमें एक और संकल्प लेना चाहिए—अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने का। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
इस दिन चिकित्सकों, आयुर्वेदाचार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों का योगदान भी विशेष रूप से याद किया जाना चाहिए। समाज को स्वस्थ रखने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही आयुर्वेद सहित सभी प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता और उचित चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
धन्वंतरि जयंती का वास्तविक संदेश यही है कि समृद्धि का अर्थ केवल धनवान होना नहीं, बल्कि तन और मन से स्वस्थ होना भी है। हमें ऐसा समाज बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं हर व्यक्ति तक पहुंचें और लोग बीमारी के उपचार के साथ-साथ उससे बचाव को भी प्राथमिकता दें।
इस धनतेरस पर आइए, दीपों की रोशनी के साथ अपने जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का संकल्प लें। क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी तिजोरी में रखा धन नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और प्रसन्न मन है।
सभी देशवासियों को भगवान धन्वंतरि जयंती एवं धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।
संपादकीय | 6 नवंबर 2026
भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देते हैं। धनतेरस यानी धनत्रयोदशी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हमें धन-संपत्ति के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य की अहमियत का एहसास कराता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ा हुआ है। इसी अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तब उससे अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए। इसी समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा पद्धति का देवता माना जाता है। भारतीय परंपरा में उनका स्थान केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन की कामना से भी जुड़ा है।
आज के दौर में जब बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, मानसिक तनाव और प्रदूषण जैसी चुनौतियां लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, तब धन्वंतरि जयंती का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि बड़ी से बड़ी संपत्ति भी अच्छे स्वास्थ्य के सामने छोटी है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो धन, वैभव और सुविधाओं का आनंद भी अधूरा रह जाता है।
धनतेरस पर लोग सोना, चांदी, बर्तन और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। घरों में माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन इस अवसर पर हमें एक और संकल्प लेना चाहिए—अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने का। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
इस दिन चिकित्सकों, आयुर्वेदाचार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों का योगदान भी विशेष रूप से याद किया जाना चाहिए। समाज को स्वस्थ रखने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही आयुर्वेद सहित सभी प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता और उचित चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
धन्वंतरि जयंती का वास्तविक संदेश यही है कि समृद्धि का अर्थ केवल धनवान होना नहीं, बल्कि तन और मन से स्वस्थ होना भी है। हमें ऐसा समाज बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं हर व्यक्ति तक पहुंचें और लोग बीमारी के उपचार के साथ-साथ उससे बचाव को भी प्राथमिकता दें।
इस धनतेरस पर आइए, दीपों की रोशनी के साथ अपने जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का संकल्प लें। क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी तिजोरी में रखा धन नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और प्रसन्न मन है।
सभी देशवासियों को भगवान धन्वंतरि जयंती एवं धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।
रिपोर्ट: एम. के. राजपूत, लखनऊ
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