चिल्ला में अवैध खनन से बिगड़ा जमीन का स्वरूप, भूजल तक पहुंची खुदाई - अब पैमाइश और कार्रवाई की मांग

बारा, प्रयागराज।।यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत चिल्ला गांव के समीप मिट्टी की खुदाई का मामला अब एक-दो गड्ढों तक सीमित नहीं है। मौके पर जगह-जगह हुई गहरी खुदाई देखकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहीं किसानों की निजी जमीन से मिट्टी निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है, तो कहीं सार्वजनिक बंजर और राजस्व भूमि से भी खुदाई के आरोप हैं। कई स्थानों पर खुदाई इतनी गहरी हो चुकी है कि गड्ढों में भूजल दिखाई देने लगा है। मौके पर जेसीबी चालक ने बताया कि किसान लालचंद यादव निवासी चैनपुरवा की जमीन से मिट्टी निकाली जा रही थी और उसे इंटरलॉकिंग ईंट फैक्ट्री में पहुंचाया जा रहा था। चालक ने जेसीबी मालिक का नाम पवन पटेल बताया। वहीं कोल्ड स्टोरेज के नाम से प्रसिद्ध फैक्ट्री की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सवाल है कि निजी जमीन के अलावा सार्वजनिक बंजर और राजस्व भूमि से मिट्टी निकालने की अनुमति किसने दी? क्या भूमि की पैमाइश हुई और वास्तविक खुदाई कितनी हुई? जगह-जगह बने गहरे गड्ढे व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं। यदि राजस्व भूमि से बिना अनुमति मिट्टी निकाली गई है, तो यह सरकारी संपत्ति की क्षति का भी गंभीर विषय है। गुरुवार को मीडिया के मौके पर पहुंचने पर जेसीबी चालक ने मालिक से फोन पर बात की, इसके बाद जेसीबी और ट्रैक्टर मौके से निकलने लगे। खनन इंस्पेक्टर वैभव सोनी ने बताया कि पहले उन्हें जानकारी नहीं थी, अब मामला संज्ञान में आ चुका है और जल्द कार्रवाई होगी। मिट्टी फैक्ट्री तक पहुंचने की बात सामने आने के बाद उसके संचालन, कच्चे माल, तैयार ईंटों की गुणवत्ता, मानकों के अनुरूप परीक्षण, प्रदूषण बोर्ड की अनुमति और चिमनी के धुएं की जांच भी जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रदूषण की आशंका जताई है। अब जनता को निष्पक्ष पैमाइश चाहिए।
रिपोर्ट: बालेंद्र कुमार शुक्ला (बलराम), विशेष संवाददाता, प्रयागराज
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